अब भी वक्त हैं, पेहचान ले,
जिंदगी मुझे तू अपना मान ले।
बदनाम न हो खुदा इस लिए,
लोग मुझे कसूरवार जान ले।
चलता कैसा कारोबार यहाँ देखो,
सब आंसू के बदले मुस्कान ले।
हर घाव कागज़ पर क्या लिखूं?
तू ख़ुद का ही झाँख गिरेबान ले।
थोड़े वक्त का मेहमान है 'ताइर',
आ के उतार अपना एहसान ले।
डर: एक माईक्रो कथा
1 day ago
