Thursday, August 14, 2008

अब तक...

सफर बस वैसा ही बरक़रार है अब तक,
ख़ुद को ख़ुद ही का इंतज़ार है अब तक।

चैन-ओ-सुकून मिले भी तो कहाँ से?
ज़हनो दिल के बिच एक दीवार है अब तक।

छोड़ दिया तुमने फ़िर भी आज़ाद ना हुआ,
जज्बातों पे तेरा जो इख्तियार है अब तक।

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

क्या हो इलाज उसका किसी दवा या दुआ से?
अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

9 comments:

  1. आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
    बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

    क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
    अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।बहुत अच्छा लिखा है। बधाई

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  2. छोड़ दिया तुमने फ़िर भी आज़ाद ना हुआ,
    जज्बातों पे तेरा जो इख्तियार है अब तक।

    आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
    बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

    वाह ! बहुत ही सुंदर लिखा है आपने ..

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  3. सफर बस वैसा ही बरक़रार है अब तक,
    ख़ुद को ख़ुद ही का इंतज़ार है अब तक।
    :
    aapne to pahle hi sher main maidan maar liya ..... badhai ho !! :)

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  4. आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
    बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।
    subhan allah.......

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  5. क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
    अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

    -बहुत उम्दा, क्या बात है!

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  6. आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
    बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।
    " beautiful composition"
    Regards

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  7. bahut khoob...achche sher kahe hain.

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  8. आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
    बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

    wah kya baat hai

    क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
    अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

    bhaut sach

    bhaut dino baad aa paayi uske liye maafi chhati hoon

    magar aaj aana jaise sarthak ho gaya

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