Monday, December 22, 2008

कश्मकश

दिल अपनी कशमकश ख़ुद ही ना जाने,

यूँ ही अपनें आप से हम हुए बेगाने।

ना सजती हैं हसीं ना बहते हैं आंसू अब,

हो क्या इलाज जब वजूद लगे ठुकराने?

दुनिया की परवाह नहीं बस तेरा है ग़म,

बिच सफर साथ छोड़ क्यों बने अंजाने ?

क्या दिल को ख्वाहिश का भी हक नहीं कोई?

या कहो शिकायत के बस मिल गए बहाने!

चेहरे पे चेहरा लगा कर जीते हैं जो,

आ गए आज हमें जीने का ढंग सिखाने!

कौन बदला है यहाँ जो बदलेगा 'ताइर'

तरीका-ए-ज़िन्दगी सब आज़ाद हैं अपनाने।

11 comments:

  1. बहुत सुंदर....बधाई।

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  2. "दुनिया की परवाह नही, बस तेरा गम है...."
    " नाजुक एहसासों की सुंदर अभिव्यक्ति....और यही एक गम क्या कम है"

    Regards

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  3. अच्छा लिखा है।

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  4. बहुत सही लिखा है...दिल को छु गई.....ऐसे हे आप लिखते रहे ....अच्छा लिखा है।

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  5. I've been thinking of a business idea. Wanted to know what you think of it. Call me sometime when you can. Cheers

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  6. कौन बदला है यहाँ जो बदलेगा ........वाह दोस्त क्या बात कही है

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  7. क्या बात है ताइर भाई....भई वह-वाह ! वह-वाह!!

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  8. दिल तो दिल से हुए हैं बेगाने
    क्यों,या तो मै जानूं या तू जाने

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  9. मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
    मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

    -----नयी प्रविष्टि
    आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

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  10. बहुत बढ़िया....आखिरी शेर ज्यादा पसंद आया!

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