05 October 2008

कैसे कैसे हसीन ख्वाब..

कैसे कैसे हसीन ख्वाब दिखा जाते हो,
खूब है अंदाज़दिल तोड़ के बहलाते हो

मांग कर मुस्कान हमसे हाल--बीमार में,
नाचारी का एहसास क्यों बार बार दिलाते हो?

मकाम--ज़िन्दगी यहाँ थमा हुआ है कब से,
और तुम हो की एक दफ़ा लौट कर ना आते हो

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो

तसव्वुर में बसे हो और हकीकत से कहीं दूर,
'ताइरसे रिश्ता क्यों  तोड़ते ना निभाते हो???

13 comments:

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है।बधाई।

मांग कर मुस्कान हमसे हाल-ए-बीमार में,
नाचारी का एहसास क्यों बार बार दिलाते हो

mehek said...

मकाम-ए-ज़िन्दगी यहाँ थमा हुआ है कब से,
और तुम हो की एक दफ़ा लौट कर ना आते हो।

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो।

wah bahut hi badhiya,makam-e-zindagiwala sher bahut hi achha laga khas karke.

Udan Tashtari said...

वाह ताईर भाई, बहुत खूब!!

venus kesari said...

एक अच्छी गजल पढ़वाने के लिए धन्यवाद
गजल की क्लास चल रही है आप भी शिरकत कीजिये www.subeerin.blogspot.com


वीनस केसरी

seema gupta said...

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो।
' what a soft and touching creation, liked it, beautiful words selection'

regards

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो।


taeer miya.. kya kahu..

bahut gahri baat kahi hai aapne is sher mein.. lajawab hai..

meeta said...

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो।
:
kya baat hai!!! sahi kaha..

makrand said...

सहारा ना बने लेकिन मशवरा ज़रूर दिया,
दुनिया से सिखा हूनर हम पे आजमाते हो।
ediited well
needling te word is great
regards

pallavi trivedi said...

तसव्वुर में बसे हो और हकीकत से कहीं दूर,
'ताइर' से रिश्ता क्यों न तोड़ते ना निभाते हो???

bahut khoob....

poemsnpuja said...

aapne to bas pahle hi sher me katl kar diya
कैसे कैसे हसीन ख्वाब दिखा जाते हो,
खूब है अंदाज़, दिल तोड़ के बहलाते हो।
kamal ka likha hai.

betuki@bloger.com said...

बहुत खूब।

bhoothnath said...

वाह-वाह....वाह-वाह....वाह-वाह....भाई ऐसे-ऐसे शेर सुनाते हो....अरे काहे को इतना सताते हो....ख़ुद तो जलते रहते हो...हमको भी जलाते हो....

siddharth said...

kya baat hai taeer bhai kya khoob likha hai..............