22 December 2008

कश्मकश

दिल अपनी कशमकश ख़ुद ही ना जाने,

यूँ ही अपनें आप से हम हुए बेगाने।

ना सजती हैं हसींना बहते हैं आंसू अब,

हो क्या इलाज जब वजूद लगे ठुकराने?

दुनिया की परवाह नहीं बस तेरा है ग़म,

बिच सफर साथ छोड़ क्यों बने अंजाने ?

क्या दिल को ख्वाहिश का भी हक नहीं कोई?

या कहो शिकायत के बस मिल गए बहाने!

चेहरे पे चेहरा लगा कर जीते हैं जो,

आ गए आज हमें जीने का ढंग सिखाने!

कौन बदला है यहाँ जो बदलेगा 'ताइर'

तरीका-ए-ज़िन्दगी सब आज़ाद हैं अपनाने।

14 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर....बधाई।

विनय said...

मान गये आपको,वाह!

...............................
http://prajapativinay.blogspot.com/

seema gupta said...

"दुनिया की परवाह नही, बस तेरा गम है...."
" नाजुक एहसासों की सुंदर अभिव्यक्ति....और यही एक गम क्या कम है"

Regards

शोभा said...

अच्छा लिखा है।

Amit said...

बहुत सही लिखा है...दिल को छु गई.....ऐसे हे आप लिखते रहे ....अच्छा लिखा है।

The Not So Talkative Man said...

I've been thinking of a business idea. Wanted to know what you think of it. Call me sometime when you can. Cheers

डॉ .अनुराग said...

कौन बदला है यहाँ जो बदलेगा ........वाह दोस्त क्या बात कही है

गौतम राजरिशी said...

क्या बात है ताइर भाई....भई वह-वाह ! वह-वाह!!

अनुपम अग्रवाल said...

दिल तो दिल से हुए हैं बेगाने
क्यों,या तो मै जानूं या तू जाने

श्रद्धा जैन said...

koun badla hai yaha

bahuthi achha kaha hai aajkal sabhiapne tarike se hi jina chahtehain aur isiliye rishte shayad kamzor ho gaye hain

bahut dino ke baad pada bahut achha laga

Harkirat Haqeer said...

acchi lagi aapki abhivyakti...

nav varas ki subh kamnayen.....

विनय said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
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Fighter Jet said...

bahut badhiyaan!

pallavi trivedi said...

बहुत बढ़िया....आखिरी शेर ज्यादा पसंद आया!