13 November 2008

चंद लम्हें

चंद लम्हें नशे के मंज़र साफ़ कर गए,
रिश्तो के आईने को बेनकाब कर गए।

भीगी सी आँखों से झिलमिल यूँ दूर हुई,
आंसू-ओ-ख्वाब पुरा हिसाब कर गए।

होश में हर बयाँ जो होता था अनसुना,
खुमार में कही वो बात, तो तमाम कर गए।

नहीं होता ग़म किसी के छोड़ने का दिल को,
शुक्र हैं बहोत जल्द वो आजाद कर गए।

खुशनसीबी 'ताइर' की ये भी देखो यारों,
आप ही उसे अब तो ख़ुद के साथ कर गए।

15 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

भीगी सी आँखों से झिलमिल यूँ दूर हुई,
आंसू-ओ-ख्वाब पुरा हिसाब कर गए।


bahut khoob sarkar... ye sher pasand aaya..

Udan Tashtari said...

बहुत खूब ताईर भाई..आनन्द आ गया.

रंजना said...

waah ! bahut sundar...

"अर्श" said...

नहीं होता ग़म किसी के छोड़ने का दिल को,
शुक्र हैं बहोत जल्द वो आजाद कर गए।


bahot khub sahab kya bat kahi hai aapne umda sundar likha hai apne..dhero badhai aapko...

रंजना [रंजू भाटिया] said...

होश में हर बयाँ जो होता था अनसुना,
खुमार में कही वो बात, तो तमाम कर गए।

बहुत सुंदर

डॉ .अनुराग said...

नहीं होता ग़म किसी के छोड़ने का दिल को,
शुक्र हैं बहोत जल्द वो आजाद कर गए।


अरसे बाद नजर आये आप इस राह पर .ये शेर खूब है हजूर

mehek said...

नहीं होता ग़म किसी के छोड़ने का दिल को,
शुक्र हैं बहोत जल्द वो आजाद कर गए।

waah abhut hi badhiya

गौतम राजरिशी said...

लानत है मुझ पर कि अब तक मैं आपके ब्लौग से वंचित था...
ताइर साब,सुभानल्लाह
लगभग सब पढ़ गया और फिर आता हूँ वापस पढ़ने....गज़ल का एक अदना सा साधक हूँ,और ये तो वही बात हो गयी कि बगल में खजाना , गली भर ढ़िढ़ोरा....गलत मुहावरा?
मेरी दिली बधाई स्वीकर हो इन अलौकिक रचनाओं पर

विनय said...

बेहतरीन!

Jimmy said...

Very Nice Post


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www.discobhangra.com

pallavi trivedi said...

behtareen....

अल्पना वर्मा said...

भीगी सी आँखों से झिलमिल यूँ दूर हुई,
आंसू-ओ-ख्वाब पुरा हिसाब कर ग


bhaavpuran rachna --achchee lagi

shama said...

Uf!!Kin, kin panktiyon kaa kin, kin rachnaonmese zikr karoon ??Abhee to inhen baar, baar padhna baaqee hai...kayee baar aana hoga...aur dertak rukna hoga..!
Itne diggajon ne tippaniyan kee hain...unse sehmat hun, mai ek adnaas- wykti aur alagse kya kahun ?
Aajkal mai apne blogpe apne rishonke aaeene ko benaqab kar rahee hun...mai na lekhika hun na kavi, itna to sach apne baareme jaantee hun.

bhoothnath said...

ठीक जा रहे हैं कदम....राह जरा काँटों भरी है....थाम के रखना कदम.....

poemsnpuja said...

nahin hota gam kisi ke chhodne ka dil ko
shukra hai bahot jald wo aajad kar gaye.

behtarin sher laga, gazal bhi behad khoobsoorat hai.