14 August 2008

अब तक...

सफर बस वैसा ही बरक़रार है अब तक,
ख़ुद को ख़ुद ही का इंतज़ार है अब तक।

चैन-ओ-सुकून मिले भी तो कहाँ से?
ज़हनो दिल के बिच एक दीवार है अब तक।

छोड़ दिया तुमने फ़िर भी आज़ाद ना हुआ,
जज्बातों पे तेरा जो इख्तियार है अब तक।

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

क्या हो इलाज उसका किसी दवा या दुआ से?
अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

10 comments:

शोभा said...

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।बहुत अच्छा लिखा है। बधाई

रंजना [रंजू भाटिया] said...

छोड़ दिया तुमने फ़िर भी आज़ाद ना हुआ,
जज्बातों पे तेरा जो इख्तियार है अब तक।

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

वाह ! बहुत ही सुंदर लिखा है आपने ..

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

soch raha hu kaunsa sher sabse badhiya likhu..

sare hi sher dhardhar hai.. taeer miya.. yuhi padhwate rahiye..

aur kya kahu.. baki sab to aapse keh diya..

meeta said...

सफर बस वैसा ही बरक़रार है अब तक,
ख़ुद को ख़ुद ही का इंतज़ार है अब तक।
:
aapne to pahle hi sher main maidan maar liya ..... badhai ho !! :)

अनुराग said...

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।
subhan allah.......

Udan Tashtari said...

क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

-बहुत उम्दा, क्या बात है!

The Not So Talkative Man said...

Wah wah. Su vaat chhe. Mazaa aa gaya.

seema gupta said...

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।
" beautiful composition"
Regards

pallavi trivedi said...

bahut khoob...achche sher kahe hain.

श्रद्धा जैन said...

आज की ख़बर न फिक्र आने वाले कल की,
बीते हुए कल का शायद वो खुमार है अब तक।

wah kya baat hai

क्या हो इलाज उसका किसी दावा या दुआ से?
अपने ही वजूद का 'ताइर' बीमार है अब तक।

bhaut sach

bhaut dino baad aa paayi uske liye maafi chhati hoon

magar aaj aana jaise sarthak ho gaya