29 June 2008

अब भी वक्त हैं...

अब भी वक्त हैं, पेहचान ले,
जिंदगी मुझे तू अपना मान ले।

बदनाम न हो खुदा इस लिए,
लोग मुझे कसूरवार जान ले।

चलता कैसा कारोबार यहाँ देखो,
सब आंसू के बदले मुस्कान ले।

हर घाव कागज़ पर क्या लिखूं?
तू ख़ुद का ही झाँख गिरेबान ले।


थोड़े वक्त का मेहमान है 'ताइर',
आ के उतार अपना एहसान ले।

13 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल said...

जिंदगी मुझे तू अपना मान ले।
कमाल की लाइन है.. बहुत अच्छे ताईर मिया

रंजू ranju said...

चलता कैसा कारोबार यहाँ देखो,
सब आंसू के बदले मुस्कान ले।

बहुत खूब लिखा है आपने

Rajesh Roshan said...

चलता कैसा कारोबार यहाँ देखो,
सब आंसू के बदले मुस्कान ले।

बहुत खूब

manishi... said...

kabhi kabhi soch mein pad jaate hain ham, ki khayalon ko aap baandhte hain shabdon mein, ya unhe udaan dete hain soch ki...:)
Hamesha ki tarah khoobsurat andaz..

vipinkizindagi said...

बहुत सुंदर

Udan Tashtari said...

हर घाव कागज़ पर क्या लिखूं?
तू ख़ुद का ही झाँख गिरेबान ले।

-बढ़िया.

श्रद्धा जैन said...

हर घाव कागज़ पर क्या लिखूं?
तू ख़ुद का ही झाँख गिरेबान ले।

wah taeer ji kya baat kahe di hai
aapki gazal ki khasiyat hi yahi hai ki aap har sher main dil se daad loot lete ho

DR.ANURAG said...

थोड़े वक्त का मेहमान है 'ताइर',
आ के उतार अपना एहसान ले।


vah behad umda....girebaan val sher bhi khoob hai....

swati said...

jeevan-samvad bahut sundar raha....

seema gupta said...

हर घाव कागज़ पर क्या लिखूं?
तू ख़ुद का ही झाँख गिरेबान ले।
"wah bhut sunder"

शहरोज़ said...

सरसरी ही सही कई चीज़ें देख गया .आपकी काविशों और कोशिशों को देख तबियत खुश हो गयी .
कई शे'र जेहन नशीं होने की कुवत रखते हैं .दुआ यही है ,जोर काला और ज्यादा .कभी फ़ुर्सत मिले तो इस लिंक पर भी जाएँ और अपनी कीमती राय से नवाजें .www.shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com और www.hamzabaan.blogspot.com
जनाब आपका ब्लॉग है बहुत खूबसूरत .मुबारक हो .अल्लाह नज़र-बद से बचाए .आमीन.

Advocate Rashmi saurana said...

aap ko padhana bhut aacha laga. ati uttam. likhate rhe.

seema gupta said...

"shabon se trasha hai gazal ko is treh, aaj vo hmara bhee ek salam le"